बांदा जिले के सरकारी अस्पताल में मौत की सौदेबाजी बदस्तूर जारी है। सरकारी डॉक्टर मरीजों से मोटी रकम लेकर प्राइवेट क्लीनिक और अल्ट्रासाउंड सेंटरों में ऑपरेशन कर रहे हैं, जिससे मरीजों की जान जा रही हैं क्योंकि प्राइवेट सेंटरों में पर्याप्त इक्यूपमेंट नहीं होते हैं।
एक ऐसा ही मामला जिला अस्पताल से सामने आया है। यहां पेट दर्द की समस्या को लेकर मरीज को भर्ती किया गया था, जिसका ट्रीटमेंट ओपीडी में नियुक्त डॉक्टर रामेंद्र कर रहे थे। मरीज के तीमारदारों से डॉक्टर ने मोटी रकम मांगी और प्राइवेट में ऑपरेशन करने की बात कही। तीमारदार मरीज की भलाई के लिए मान गए और डॉक्टर की बताई जगह एक अल्ट्रासाउंड सेंटर में ले गए, जहां मरीज का ऑपरेशन किया गया पर मरीज की हालत बिगड़ गई।
इसके बाद उसे कानपुर रेफर कर दिया, लेकिन उसकी मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने शव रखकर प्रदर्शन किया और कार्रवाई की मांग की है। बिसंडा थाना अंतर्गत चौसड़ गांव निवासी मरीज कल्लू को दो दिन पूर्व पेट दर्द की समस्या को लेकर ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। यहां से ओपीडी के लिए शिफ्ट कर दिया गया। मरीज के इलाज की जिम्मेदारी सर्जन डॉक्टर रामेंद्र को मिली, जिन्होंने प्राइवेट में ऑपरेशन करने की सलाह दी।
मरीज की भलाई के लिए हुए राजी
तीमारदार मरीज की भलाई के लिए राजी हो गए और मरीज को डॉक्टर की बताई जगह देव अल्ट्रासाउंड एंड यूनिक सोनोकेयर डायग्नोस्टिक सेंटर लेकर पहुंच गए, जहां डॉक्टर ने ऑपरेशन किया और दुबारा जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया पर मरीज की हालत बिगड़ने लगी। इसके बाद डॉक्टर ने दोबारा अल्ट्रासाउंड किया और कानपुर रेफर कर दिया, जहां मरीज की मौत हो गई।
नाराज परिजनों का प्रदर्शन
कानपुर के डॉक्टरों ने गलत ऑपरेशन किए जाने की बात कही, जिससे नाराज परिजन शव लेकर बांदा आए और देव अल्ट्रासाउंड सेंटर के बाहर शव रखकर प्रदर्शन करने लगे। वहीं, सीएमओ अनिल श्रीवास्तव से जब फोन में बात की गई तो उन्होंने बताया की बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी